Women's power

कल वीमेन क्रिकेट का फाइनल देखा। हमारी टीम बहुत अच्छा खेल रही थी। कुछ गलतियों की वजेह से या फाइनल को जीतने के तनाव से कुछ रन से हार गए। कुछ खिलाड़ी तो पुरुषवर्ग की टीम से भी अच्छाखेलती है। उनका विकेट पर थ्रो इतना अच्छा है की मुझे लगता है की यदि महिला टीम को भी सही ट्रेंनिग व् अच्छे कोच मिले तो  वे  भी न.1बन जायेगी। पर हमारी विडम्बना है की महिला वर्ग को कोई आगे लाने की चाहत नहीं रखते। पुरुष क्रिकेट टीम हारे तो भी करोड़ो ₹मैं खरीदे जाते है।पर महिला वर्ग के लिए कोई क्यों आगे नहीं आते। हमे इस पर विचार करना ही चाहिए। मुझे अपनी महिला टीम पैर गर्व है।

Comments

  1. In fact they were playing so well that at one point of time I thought that like other domestic competitions board should have schedule a yearly 3 match series between boys v/s girls.It will lift their confidence and commercial value.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Life force energy