अमानवीयता
आज सुबह सुबह पेपर मैं एक खबर ने दिल देहला दिया।देहली एक व्यक्ति पूरी रात एक एक्सीडेंट के बाद सड़क पर पड़ा रहा।आते जाते लोगो से रिक्वेस्ट करता रहा की मैंने पी नहीं रखी है मुझे अस्पताल पंहुचा दो। पर किसी ने नहीं ध्यान नहीं दिया कोई उसका पर्स ले गया कोई मोबाइल और कोई उसके बेग से 15,000₹ले गया। यहातक कि उसकी जेब के 12₹भी निकल लिए। सुबह ट्रेफिक पुलिस ने उसे अस्पताल पहुचाया। ये पढ़ केर रूह काँप गयी। क्या हो गया है हम लोगो को ?इतने निष्ठुर कैसे हो गए। किसी भी इंसान की हालात से भी समझ नहीं सकते या समझना नहीं चाहते। सेवाभाव या दयाभाव हमारी डिक्शनरी से कहा चले गए। क्यों हम इतने कठोर हो रहे है। हमारा देश तो सदा से दया करुणा प्रेम और मानवता के लिए जाना जाता है । हमे यह सोचना चाहिए की की हमारी आने वाली पीढ़ी को हम क्या सिखा रहे है।यदि ये आज किसी अनजान के साथ हुआ है तो कल हमारे साथ न हो। अकस्मात् तो कही भी कभी भी होता है। सिर्फ अपने ही बारे मैं सोचना गलत है। यदि किसी को हमारी जरुरत है तो निस्वार्थ भाव से उसकी सहायता करे। ईशवर से प्रार्थना करती हु की अब कभी ऐसी ख़बर पढ़ने मैं न आये।
सच में क्या होगया हे आज लोगो को .....सोच से पर हे ये मानसिकता
ReplyDeleteसच में क्या होगया हे आज लोगो को .....सोच से पर हे ये मानसिकता
ReplyDeleteअतिथि देवो भवः वाले देश में आज इंसान की कीमत कुछ नहीं।ये तो हद हो गयी की लोग मारने वाले की सभी वस्तुएं एवम् पैसा तक ले जाते हैं।पशुओं की सुरक्षा के मुद्दे पर अब तो इंसानो का वध हो रहा है,चिंता का एवम् ,चिंतन का विषय है।
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