स्त्री शक्ति
कुछ दिन पहले तुम्हारी सुल्लु देखने का मोका मिला। फ़िल्म ने बहुत कुछ सोचने पे मज़बूर कर दिया। क्या आपको भी लगता है कि हर महिला के भीतर एक सुलू छुपी है। हम सभी ने कभी न कभी बहुत कुछ करने का सपना देखा । कभी सफलता मिलती है कभी नहीं।इन्ही दिनों हमारे देश की हरियाणवी कन्या मानुषी ने विश्व सुंदरी का ख़िताब अपने नाम कर के देश का गौरव बढ़ाया। मानुषी के फाइनल जबाब ने उसे जिताया ऐसा कहा जा रहा है। उसने बचपन से जो सपना देखा उसे पूरा किया। माँ को सर्वोच्च स्थान दिया। ये सही भी है एक माँ यदि जॉब करती है तो उसकी जिम्मेदारी डबल हो ही जाती है । पर घर पे रह करभी वो अपने बच्चों का जीवन संवारने में अपना पूरा जीवन लगा देती है। और जब बच्चे अपनी सफलता का श्रेय माँ को देते है तो सर गर्व से ऊँचा हो ही जाता है।
एक महिला को बाहरी जिम्मेदारियो के साथ घर भी संभालना होता है। अभी पेप्सिको सीओ की सीईओ इंन्द्रा नूई का एक इंटरव्यू सुना । उन्होंने बताया की मेरी माँ ने कहा की बाहर तुम चा हे कितनी भी बड़ी पोस्ट पर रहो पर घर के इस दरवाजे के भीतर तुम एक माँ,बीवी,बहु,बेटी रहोगी। साथ मैं परिवार की जिम्मेदारिया भी संभालना जरूरी है।
तुम्हारी सुलु मे भी यही दिखाया है एक छोटी सी गलती ने बच्चे पर बुरा असर कर दिया ।
हमे अपने सपने पूरे करने के साथ परिवार को भी देखना ही चाहिए।एक लड़की पैदा होती है तो खुशियां ही माननी चाहिए और उसे अच्छी से अच्छी शिक्षा दे कर उसे उसके सपने पुरे करने का अवसर प्रदान करना चाहिए। इति।
महिलाओं का योगदान बहुमूल्य है और हमारे देश में महिलाओं की बढ़ती शिक्षा और उनके योगदान को अब साफ़ साफ़ देखा जा सकता है।ये एक शुभ संकेत है हमारे विकास के लिए।
ReplyDeleteमहिलाओ का योगदान तो हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहा है और आजकल अधिकतर महिलाएं दोहरी जिम्मेदारियां भी निभा रहे है ओर सल्लू में तो शायद हर महिला ने अपना रूप देखा होगा , अब जो थोड़ा बदलाव ये देखने मे आता है कि मानसिकता भी लोगो की बदल रहीहै जो समाज के।लिए शुभ संकेत है
ReplyDeleteधन्यवाद रेनू
ReplyDeleteWah maa...sahi kaha bilkul
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