बीती ताहि बिसार दे।
जैसा लेख कि हेडिंग से ही पता चल रहा है बीती ताहि बिसार दे आगे की सुध ले। कितनी गहरी बात है, रोजमर्रा की जिंदगी में हम ये बात भूल गए, कई बार ऐसा होता है की हम जब भी अकेले होते है या परिवार के साथ होते है तो पुरानी बाते करते हैं। यादें मधुर मीठी हो तो बहुत अच्छा लगता है पुरानी यादों में खो जाना उसे युग में चले जाने का मन करता है। किंतु जब यादें सुकून देने वाली न हो तो उन्हे याद नही करना ही बेहतर है। भाई बहन या परिवार के सदस्य जब भी मिलते है तो ज्यादातर यही होता है, बचपन की यादों में खो जाते है , किंतु जब यही शिकवे, शिकायत, के रूप में सामने आती है तो मन दुःखी हो जाता है।इसीलिए हमें बीती ताहि बिसार दे याद रखना चाहिए। संबंधों की मधुरता इससे बनी रहती है।वही बाते याद रखे जिनसे मन को खुशी मिले और हम उन्हे बार बार दोहराना चाहे। हम में से कोई भी करोना को और उस बुरे भयावह समय को याद नही करना चाहते,पर जिनके अपने साथ छोड़ गए उनकी तो याद आती ही है। हमें चाहिए की हम उनकी अच्छी यादों को याद करें और उस समय की बुरी यादों को भूलने की कोशिश करें,तभी जीवन आसान और सरल होगा।
पुरानी बाते दोहराने से हम ही दुख मिलता है। बढ़ते समय के साथ आगे बढ़े,और संबंधों में मधुरता बनाए रखे। जीवन आसान हो जायेगा। चलो फिर बचपन की मीठी बातें करते हैं,और बच्चे बन जाते है, न किसी से बैर रखना बस दोस्ती प्यार।
इति।
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