परिवार
आज विश्व परिवार दिवस है। पाश्चत्य देशों में इस तरह के दिवस मनाने की परंपरा है। क्यों कि वहां सभी एकल परिवार है। बच्चे adult होते ही माता पिता से अलग हो जाते है। तो एक दिन सब मिल कर सेलिब्रेट करते है।
किंतु हमारे देश में तो हम परिवार के बीच ही बड़े होते है और जीवन पर्यन्त परिवार के साथ ही रहते है। अब हमारे देश में भी पाश्चत्य सभ्यता पैर पसार रही है। एकल परिवार बढ़ रहे है, बच्चे परिवार में अपने रिश्तों से दूर रहना चाहते है, उनके जीवन में कोई दखल दे वो उन्हे पसंद नही आता।
अभी कुछ समय पहले रॉबिन शर्मा की बुक The family wisdom पढ़ने का अवसर मिला। परिवार के महत्व को बहुत सुंदर ढंग से समझाया है।
परिवार ईश्वर की दी हुई पहली गिफ्ट है, जो हमे जन्म के साथ मिलती है, और इस उपहार को संभाल कर रखना चाहिए। बच्चो को दादा दादी,नाना नानी,और अन्य रिश्तों के महत्व को बताना चाहिए।न की उनसे दूर करना चाहिए, परिवार में हर रिश्ते का अपना महत्व होता है, और हम बचपन से बच्चो को बताए इस महत्व को तो जीवन पर्यंत वे रिश्तों का सम्मान करते हैं। भाई बहन के रिश्ते खुशी देते है ,उनसे अपनी बात कह कर आपका तनाव दूर होता है, इसीलिए रखा बंधन का पर्व मनाते है रिश्तों की मजबूती के लिए हमारे पर्व बहुत सहायक है,।
परिवार हर समय जीवन भर अंतिम क्षनो तक हमारे साथ होता है,परिवार से संस्कार मिलते है, परिवार की परंपरा को निभाइए,ये संस्कार आगे आनेवाली पीढ़ी तक पहुंचते है, इस तरह आप और आगे आनेवाली पीढ़ि और पूर्वज तक साथ रहते है।ये है असली परिवार, छोटे को प्यार से बड़ा करना, युवाओं को जीवन की समझ देना, बड़े बुजुर्गो का सम्मान करना रिश्ते निभाना ,सब परिवार से सीखते है।परिवार की छांव तले सब परेशानी दूर होती है। अकेले में तनाव बढ़ता है ,परिवार में समस्या का हल आसानी से हो जाता है।
इस परिवार दिवस पर ये निश्चय करे की परिवार के साथ अपनी खुशियां और गम दोनों साझा करेगें,और यही अपने बच्चो में संस्कार डालेंगे।
कई लोग मेरी बात से सहमत नही होगे, किंतु ये मेरे अपने विचार है।जो The family wisdom पढ़ने के बाद आए,,। अपने आसपास लोगो के बीच इस कमी को महसूस किया जा सकता है, अतः कोशिश करे की आपके बच्चें कभी परिवार का साथ न छोड़े।
इति
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